भारत की संस्कृति ने वसुधैव कुटुम्बकम् का आदर्श देकर मानवता के बीच के भेदभाव को मिटाने का कार्य किया है।

आज अहमदाबाद स्थित शाहीबाग BAPS स्वामीनारायण मंदिर में के. के. बिड़ला फाउंडेशन द्वारा आयोजित 34वें सरस्वती सम्मान समारोह में उपस्थित रहना मेरे लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय रहा।

स्वामी भद्रेशदासजी महाराज को उनके अद्वितीय ग्रंथ ‘स्वामीनारायण सिद्धांत सुधा’ के लिए सर्व प्रतिष्ठित “सरस्वती सम्मान 2024” से अलंकृत किया गया।

हमारे शास्त्रों का सन्देश है कि जो कार्य करते समय भय, लज्जा या शंका उत्पन्न हो, वह कार्य कभी नहीं करना चाहिए। यही जीवन का सच्चा मार्गदर्शन है।

स्वामी भद्रेशदासजी का यह ग्रंथ वेद, गीता, उपनिषद और दर्शनशास्त्र की झलक प्रस्तुत करता है। भारतीय मनीषा और दार्शनिक परंपरा का यह गौरवशाली योगदान न केवल समाज को दिशा देगा बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर बनेगा।

मैं स्वामी भद्रेशदासजी महाराज को इस गरिमामय सम्मान के लिए हृदय से बधाई देता हूं और के.के. बिड़ला फाउंडेशन को भी इस पावन कार्य हेतु साधुवाद प्रेषित करता हूं।






